मुंबई के कॉटन ग्रीन इलाके में रहने वाले 48 वर्षीय मोबाइल रिपेयरिंग करने वाले महेंद्र म्हापणकर उस समय हैरान रह गए, जब उन्हें इनकम टैक्स और जीएसटी विभाग की ओर से करीब 32 करोड़ रुपये के टैक्स बकाये का नोटिस मिला। महेंद्र के मुताबिक, जिन कारोबार और लेन-देन के आधार पर यह नोटिस जारी किया गया, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।
मामले में मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंसेस विंग (EOW) ने केस दर्ज किया है। आरोप है कि महेंद्र के एक जानकार ने उनके दस्तावेजों का कथित तौर पर दुरुपयोग कर उनके नाम पर फर्जी कंपनी और बैंक खाते खुलवाए और उनके नाम से करोड़ों रुपये का एक्सपोर्ट कारोबार किया।
लॉकडाउन के दौरान हुई थी आरोपी से मुलाकात
पुलिस के मुताबिक, महेंद्र म्हापणकर कॉटन ग्रीन के फेरबंदर इलाके में अपने परिवार के साथ रहते हैं और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करते हैं। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान उनका काम पूरी तरह प्रभावित हो गया था।
इसी दौरान उनकी मुलाकात संजय तांबे नाम के व्यक्ति से हुई। उस समय तांबे कथित तौर पर क्लीन-अप मार्शल के रूप में काम करता था। आरोप है कि तांबे ने महेंद्र से कहा कि उसके कुछ दोस्तों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता है।
पुलिस के अनुसार, तांबे की बातों पर भरोसा करके महेंद्र ने अपने कुछ दस्तावेज उसे सौंप दिए।
दस्तावेजों से बनाई ‘गैलेक्सी ट्रेडर्स’
आरोप है कि दस्तावेज मिलने के बाद संजय तांबे ने महेंद्र के नाम पर ‘गैलेक्सी ट्रेडर्स’ नाम की कंपनी रजिस्टर करा ली। पुलिस के मुताबिक, तांबे ने महेंद्र को भरोसा दिलाया था कि कारोबार से होने वाले मुनाफे का एक हिस्सा उनके बैंक खाते में जमा किया जाएगा।
इसी भरोसे के चलते महेंद्र ने कथित तौर पर दो अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाने में भी तांबे की मदद की। इसके बाद जब भी महेंद्र कारोबार या मुनाफे के बारे में पूछते थे, तो आरोपी कथित तौर पर उन्हें बताता था कि कारोबार में अभी कोई फायदा नहीं हुआ है।
करोड़ों के कारोबार की जानकारी मिलने पर उड़े होश
मामला तब सामने आया जब महेंद्र को इनकम टैक्स और जीएसटी विभाग की ओर से करोड़ों रुपये के टैक्स बकाये से संबंधित नोटिस मिले। नोटिस में जिस कारोबार और लेन-देन का उल्लेख था, उसके बारे में महेंद्र ने किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया।
इसके बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की। मुंबई पुलिस की EOW अब दस्तावेजों, बैंक खातों, कंपनी के कारोबार और कथित तौर पर किए गए एक्सपोर्ट लेन-देन की जांच कर रही है।
पुलिस इस बात का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि महेंद्र के दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और फर्जी कंपनी के जरिए हुए कथित करोड़ों रुपये के कारोबार में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे।