सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े दोषी अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरलेवी की मौत की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने उसकी याचिका पर गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर 1 अक्टूबर 2026 की कार्यवाही और उस दिन की पीठ संबंधी जानकारी उपलब्ध है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने बावा की याचिका पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत का रिकॉर्ड भी तलब किया। बावा ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।
38 दोषियों की मौत की सजा बरकरार
2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा था। वहीं, 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा भी कायम रखी गई थी।
इस मामले में 2008 के धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों पर हमले की साजिश, आतंक फैलाने और आतंकी प्रशिक्षण तथा साजिश से जुड़े नेटवर्क में भूमिका निभाने के आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट में आगे होगी सुनवाई
अहमद बावा ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। शीर्ष अदालत ने फिलहाल उसकी मौत की सजा पर रोक लगाते हुए गुजरात सरकार से जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई में अदालत रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे विचार करेगी।
2008 के अहमदाबाद ब्लास्ट मामले में दोषियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की प्रक्रिया जारी है। इससे पहले भी इस मामले के कुछ मृत्युदंड प्राप्त दोषियों को शीर्ष अदालत में अपील दायर करने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिला है।