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इंदौर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: प्रधान आरक्षक फिरोज खान के ठिकानों पर छापे, 33 अचल संपत्तियों का खुलासा

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इंदौर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त ने पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय इंदौर में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। बुधवार को सुबह से देर रात तक चली इस कार्रवाई में लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने देवास के आदर्श नगर स्थित उनके आवास सहित कुल 15 स्थानों पर सर्च अभियान चलाया।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के अनुसार, जांच के दौरान आरोपी पुलिसकर्मी से संबंधित कई चल और अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी अब संपत्तियों के स्रोत, खरीद और उनसे जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

वैध आय करीब 1.93 करोड़, खर्च 12.95 करोड़ रुपये

पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में आरोपी की कुल वैध आय लगभग 1,93,84,440 रुपये आंकी गई है। इसके मुकाबले चल और अचल संपत्तियों की खरीद पर करीब 12,95,72,028 रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसी के अनुसार, यह व्यय अनुमानित वैध आय से लगभग 11,01,87,588 रुपये अधिक है। लोकायुक्त की प्रारंभिक गणना में इसे आय से अधिक संपत्ति का मामला माना गया है। इस अंतर और संपत्तियों के वास्तविक स्रोतों की विस्तृत जांच की जा रही है।

रोशनी वर्मा के नाम पर कृषि भूमि का एग्रीमेंट

जांच के दौरान रोशनी वर्मा नामक महिला के नाम पर लगभग 21.75 बीघा कृषि भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, इस लेनदेन सहित अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित संपत्तियों की खरीद के लिए धन कहां से आया और उनमें आरोपी की क्या भूमिका रही।

मां, पत्नी और कंपनी के नाम पर संपत्तियों की जांच

लोकायुक्त के अनुसार, अब तक की सर्च कार्रवाई में आरोपी से संबंधित कुल 33 अचल संपत्तियों का पता चला है। ये संपत्तियां कथित तौर पर स्वयं आरोपी, उनकी पत्नी, मां, रोशनी वर्मा और साहिल ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर हैं। कुछ संपत्तियों को बेनामी होने के संदेह के आधार पर भी जांच के दायरे में रखा गया है।

इन अचल संपत्तियों की खरीद पर लगभग 11,57,49,818 रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं, इनका अनुमानित वर्तमान बाजार मूल्य करीब 29,73,18,768 रुपये बताया गया है।

दस्तावेजों और संपत्तियों की जांच जारी

लोकायुक्त की संयुक्त टीमें छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी की घोषित और वैध आय के मुकाबले संपत्ति में कितनी वृद्धि हुई और उसका स्रोत क्या है।

फिलहाल सामने आए आंकड़े जांच एजेंसी की प्रारंभिक जानकारी पर आधारित हैं। संपत्तियों के स्वामित्व, धन के स्रोत और कथित अनियमितताओं को लेकर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

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