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48 घंटे उल्टी नाव से चिपका रहा 15 साल का किशोर, बेरिंग सागर में मौत को दी मात; भाई समेत दो की मौत

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अलास्का | अमेरिका के अलास्का स्थित बेहद ठंडे और दुर्गम बेरिंग सागर में 15 वर्षीय किशोर ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए करीब 48 घंटे तक समुद्र में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया। छोटी नाव पलटने के बाद किशोर उसकी उल्टी हुई सतह से चिपका रहा। करीब दो दिन बाद एक मछली पकड़ने वाली नौका ने उसे सुरक्षित बचा लिया। हालांकि, इस हादसे में उसके 35 वर्षीय बड़े भाई और एक अन्य रिश्तेदार की मौत हो गई।

नाव पलटने के बाद शुरू हुआ जिंदगी का सबसे मुश्किल संघर्ष

बचावकर्मियों के मुताबिक, समुद्र में नाव पलटने के बाद किशोर और उसका रिश्तेदार कुछ समय तक उल्टी नाव को पकड़े रहे। लेकिन तेज लहरों, बेहद ठंडे पानी और लगातार कमजोर होती शारीरिक क्षमता के कारण रिश्तेदार की पकड़ छूट गई और वह समुद्र में बह गया।

बाद में खोज एवं बचाव दल ने किशोर के बड़े भाई और रिश्तेदार दोनों के शव बरामद कर लिए।

ठंड और अंधेरे के बीच नहीं हारी हिम्मत

किशोर को बचाने वाली मछली पकड़ने वाली नौका ‘नॉर्थवेस्ट एक्सप्लोरर’ के कप्तान एडम व्हाइट ने बताया कि रेस्क्यू के समय किशोर बुरी तरह कांप रहा था। इसके बावजूद उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और बचाव दल को अपने भाई के नाव के नीचे फंसे होने की जानकारी दी।

तटरक्षक बल ने चलाया बड़ा सर्च ऑपरेशन

परिवार शुक्रवार को सेंट लॉरेंस द्वीप के सुदूर सावूंगा गांव से मछली पकड़ने के लिए समुद्र में निकला था। उन्हें रविवार सुबह तक वापस लौटना था, लेकिन जब वे तय समय पर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनके लापता होने की सूचना दी।

इसके बाद अमेरिकी तटरक्षक बल ने सोमवार तड़के बड़े पैमाने पर खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया।

हवाई निगरानी से मिली किशोर की लोकेशन

सोमवार सुबह तटरक्षक बल के टोही विमान ने समुद्र में काफी दूर एक पलटी हुई नाव देखी। विमान से किशोर के लिए जरूरी जीवनरक्षक सामग्री गिराई गई और पास मौजूद नॉर्थवेस्ट एक्सप्लोरर को उसकी मदद के लिए भेजा गया।

रेस्क्यू टीम ने किशोर को नाव के उल्टे पेंदे से चिपका हुआ पाया और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

पिता की मौत के बाद भाई ही था अभिभावक

परिजनों के अनुसार, बचाया गया किशोर डेरेक पार्कर अघनांगा अपने 35 वर्षीय बड़े भाई सिडनी कुलोवियी के बेहद करीब था। पिता के निधन के बाद सिडनी ही उसके लिए पिता जैसी भूमिका निभा रहे थे।

सिडनी एक अनुभवी व्यावसायिक कप्तान थे और सावूंगा समुदाय में अपनी मददगार और मिलनसार छवि के लिए जाने जाते थे।

सावूंगा में मछली पकड़ना जीवन का आधार

करीब 800 आबादी वाले सावूंगा गांव में मछली पकड़ना सिर्फ रोजगार का साधन नहीं, बल्कि समुदाय की पारंपरिक जीवनशैली का अहम हिस्सा है। सीमित रोजगार के कारण गांव के लोग मछली पकड़कर उसे आपस में बांटते हैं और सामुदायिक सहयोग के सहारे जीवन चलाते हैं।

इस हादसे ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया है, वहीं 15 वर्षीय किशोर का करीब दो दिनों तक समुद्र में जिंदा रहना उसके असाधारण साहस और जीवटता की मिसाल बन गया है।

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