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ताहिर हुसैन ने माना उसके इशारे पर हुई थी, दिल्ली हिंसा

खबरों का विश्लेषण

दिल्ली हिंसा मामले अब यह साफ़ हो गया हैं की, इसमें ताहिर हुसैन ने ही हिंसा को अंजाम दिया था. आपको बता दें की कुछ महीने पहले CAA के नाम पर दिल्ली में दंगे हुए थे. उन दंगों में कई लोगों की जान भी गयी थी यहाँ तक की, ताहिर हुसैन के घर के सामने बने नाले में एक लड़की की लाश मिली थी, जिसके कपडे ताहिर हुसैन के घर में थे और दूसरी और एक IB अधिकारी अंकित की लाश भी नाले में मिली थी, जिसकी हत्या भी ताहिर हुसैन के घर में हुई थी.

ताहिर से हुई पूछताछ में उसने कबूल किया है की, जब 2017 में वह आम आदमी पार्टी के टिकट पर पार्षद बना तो उसको एहसास हुआ की वह पैसे और राजनीती के दम पर हिन्दुवों को सबक सीखा सकता हैं. ताहिर हुसैन ने पूछताछ के दौरान ब्यान दिया की, “मेरे जानकर खालिद सैफी ने कहां कि तुम्हारे पास राजनीतिक पावर और पैसा दोनों है जिसका इस्तेमाल हिंदुओं के खिलाफ और कौम के लिए करेंगे. मैं इसके लिए हमेशा तैयार रहूंगा. कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद खालिद सैफी मेरे पास आया और बोला की इस बार अब हम चुप नहीं बैठेंगे. इसी बीच राम मंदिर का भी फैसला आ गया और CAA कानून भी आ गया अब मुझे लगा कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है.अब तो कुछ कदम उठाना पड़ेगा.”

आगे ताहिर हुसैन बताता है की, “8 जनवरी को खालिद सैफी ने मुझे JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद से शाहीन बाग में PFI के दफ्तर मे मिलवाया था. जहां उमर खालिद ने बोला कि वह मरने-मारने को राजी है. वह अपनी कौम के लिए कुछ भी कर सकता है. वहीं खालिद सैफी ने कहा कि PFI का सदस्य दानिश है जो हिंदुओं के खिलाफ जंग में ( PFI ) हमारी फाइनेंशियल पूरी मदद करेगा. PFI के दफ्तर में हमने प्लान बनाया कि दिल्ली में कुछ ऐसा करेंगे की यह सरकार हिल जाए और सरकार CAA विरोधी कानून वापस लेने को मजबूर हो जाए. खालिद सैफी का काम लोगों को भड़का कर सड़कों पर उतारने का था. और मुझे टास्क दिया गया था की मैं ज्यादा से ज्यादा कांच की बोतल, पेट्रोल, तेजाब, पत्थर, इकट्ठा कर अपने घर की छत पर रखूं.”

जिसके बाद क्या हुआ आप सब जानते हैं, यह कबूलनामा वैसे तो बहुत बड़ा हैं. लेकिन इससे साफ़ होता हैं की, ताहिर हुसैन 2017 से ही इस दंगे को प्लान कर रहा था. बस चाहिए थी एक वजह और वो वजह मिली CAA का बिल आने के बाद. ऐसे में सवाल आम आदमी पार्टी के उन नेताओं और वामपंथी छात्रों पर भी उठता हैं जो ताहिर हुसैन को बेकसूर बता रहे थे. आखिर वह ऐसा क्यों कर रहे थे? क्या वह भी इस दंगे के पीछे शामिल थे? सवाल काफी है, लेकिन इससे यह पता चलता हैं की लोगों को वोट देने से पहले सोच समझ कर वोट देना चाहिए की, वो किसे वोट दे रहे हैं और जीतने के बाद वो क्या कर सकता हैं.

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1 thought on “ताहिर हुसैन ने माना उसके इशारे पर हुई थी, दिल्ली हिंसा

  1. Ishwar Amit Shah ji ko jald saath kar karden.Hamen puri ummid aur dridh vishwas hai ki Bharat sahi disha men karya hai.

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