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योगी सरकार को बदनाम करने के लिए एक बड़ा दंगा चाहता है विपक्ष

खबरों का विश्लेषण

कांग्रेस इस बार मोदी को गुजरात में रोकने वाली गलती नहीं करना चाहती. आपको याद होगा 2002 दंगे के दौरान और बाद में विपक्ष ने मोदी को रोकने के लिए हिन्दू-मुस्लिम विवाद को बढ़ावा दिया था. कांग्रेस के सबसे नजदीकी पत्रकार तो आज भी अपने दिन की शुरुआत 2002 के साथ ही करते हैं.

विपक्ष हिन्दू-मुस्लिम विवाद को बढ़ावा देने में भले कामयाब भी रहा लेकिन इसका नुक्सान यह हुआ की मुस्लिम वोट बीजेपी को तो नहीं मिले लेकिन हिन्दू वोटर एकजुट हो गए और सारा वोट मोदी के नाम पर बीजेपी के पक्ष में चला गया. मोदी को रोकने के लिए अवार्ड वापसी गैंग, टुकड़े टुकड़े गैंग आदि गैंग सक्रिय की गयी लेकिन फिर भी लोगों ने मोदी सरकार पर ही भरोसा जताया.

अब योगी आदित्यनाथ को लेकर विपक्ष मोदी वाली गलती नहीं करना चाहता. इसीलिए अब मोदी सरकार को बदनाम करने से ज्यादा ध्यान पूरा विपक्ष योगी सरकार को बदनाम करने पर दे रहा हैं. उदाहरण के लिए योगी सरकार में किस तरह से गुंडों का सफाया हुआ सब जानते हैं, उसमे ज्यादातर गुंडे मुस्लिम धर्म से ही थे.

फिर भी कोई मुस्लिम नेता या मुस्लिम प्रेमी पार्टियों ने एक शब्द नहीं बोला. लेकिन जैसे ही गुंडे के नाम के आगे ठाकुर या फिर पांडेय लगा तो हर वो पार्टी जो उच्च जाती के लोगों के साथ पिछले 70 सालों से पराए नागरिक की तरह व्यवहार करती थी. वो बिना यह देखे की यह गुंडे थे, योगी सरकार की आलोचना करनी शुरू कर दी.

जिसका मतलब साफ़ है की, इस बार विपक्ष मोदी वाली गलती योगी के कार्यकाल में दोहराना नहीं चाहता. क्योंकि उसे पता है, मुस्लिम वोट योगी को न तो पड़े हैं न आगे पड़ेंगे… ऐसे में योगी को मुस्लिम विरोधी साबित करके राजनितिक फायदा नहीं मिलेगा. राजनीतिक फायदा लेना है तो योगी को जातीय आधार पर बदनाम करो.

फिर चाहे किसी उच्च जाती के बलात्कारी या फिर हत्यारे का ही एनकाउंटर हो ब्यान यह दो की योगी सरकार ब्राह्मणों के विरोध में हैं. अगर किसी दलित लड़की के साथ कुछ हो तो ब्यान दो योगी सरकार दलित विरोधी हैं. अगर किसी ठाकुर पर कानूनी अपराध के चलते कोई कार्यवाही हो तो योगी सरकार को ठाकुर विरोधी साबित करो.

जिससे मुस्लिम वोट तो पहले से ही योगी के पक्ष में नहीं है. यादव वोट, मुलायम सिंह यादव की पार्टी को भरपूर मात्रा मिलता हैं. दलित वोट पर पहले से ही मायावती का कब्ज़ा हैं. ऐसे में अगर स्वर्ण वोट किसी तरह से टूट जाये तो उत्तर प्रदेश में 2022 के चुनावों में योगी सरकार गिर जाएगी. अगर योगी सरकार गिरती है तो भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर सवाल खड़े हो जायेंगे.

ऐसे में यह फैसला अब वोटरों को खुद करना होगा की वह विपक्ष की राजनीतिक चाल को समझ पा रहें हैं या फिर उनकी चाल में फंसते जा रहे हैं.

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1 thought on “योगी सरकार को बदनाम करने के लिए एक बड़ा दंगा चाहता है विपक्ष

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