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मायावती ने उत्तर प्रदेश के प्रवासी मजदूरों के हालातों पर, कांग्रेस को दिया करारा जवाब

खबरों का विश्लेषण

जैसा की हम सब देख सकते है, पुरे देश में प्रवासी मजदूरों के क्या हाल हो रहें हैं. प्रवासी मजदूरों के हालात इस समय चिंता का विषय बने हुए हैं, लेकिन राजनितिक पार्टियां उनकी मदद के बदले उनपर राजनीती करना ज्यादा सही समझ रही हैं. राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब में भी हालात सामान्य नहीं हैं लेकिन कांग्रेस को अभी सिर्फ और सिर्फ उत्तर प्रदेश ही दिखाई दे रहा हैं.

इसी को लेकर अब बहुजन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच ट्विटर पर वॉर शुरू हो गयी हैं. दरअसल बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों को लेकर साझा किये गए वीडियो को लेकर ब्यान जारी किया था. मायावती जी के ब्यान के बाद कांग्रेस की तरफ से भी जवाब आया.

मायावती जी ने अपना ब्यान देते हुए ट्विटर पर लिखा था की, “आज पूरे देश में कोरोना लाॅकडाउन के कारण करोड़ों प्रवासी श्रमिकों की जो दुर्दशा दिख रही है उसकी असली कसूरवार कांग्रेस है. क्योंकि आजादी के बाद इनके लंबे शासनकाल के दौरान अगर रोजी-रोटी की सही व्यवस्था गांव और शहरों में की होती तो इन्हें दूसरे राज्यों में क्यों पलायन करना पड़ता?” मायावती जी के दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा की, “वैसे ही वर्तमान में कांग्रेसी नेता द्वारा लाॅकडाउन त्रासदी के शिकार कुछ श्रमिकों के दुःख-दर्द बांटने सम्बंधी जो वीडियो दिखाया जा रहा है, वह हमदर्दी वाला कम व नाटक ज्यादा लगता है. कांग्रेस अगर यह बताती कि उसने उनसे मिलते समय कितने लोगों की वास्तविक मदद की है तो यह बेहतर होता.”

फिर इसके जवाब में कांग्रेस की तरफ से जवाब आया और उन्होंने लिखा की, “कांग्रेस की मनरेगा जैसी योजनाएं इस आपदा के दौर में सबसे ज्यादा काम आ रही हैं. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने न्याय योजना लागू कर किसानों के बैंक अकाउंट में सीधा पैसा डालना शुरू किया. आपने यूपी की जनता को लूट कर अपना महल खड़ा किया और इस संकट के समय उस महल को मदद के लिए खोला भी नहीं.”

कांग्रेस यही नहीं रुकी बात गाँधी परिवार के सदस्य पर उठाये गए सवाल की थी तो उन्होंने भी आगे लिखा की, “क्या इस आपदा के दौरान मायावती जी के महल को एक दिन के लिए भी गरीबों, वंचित लोगों के लिए खोला गया. क्या उनके महल से किसी को मदद मिली? मान्यवर कांशीराम के नाम पर बनी अधिकतर कालोनियों में राशन नहीं पहुंच रहा है, लेकिन इस महल से क्या वहां मदद पहुंचाई गई?”

आपको बता दें उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य हैं. इसलिए सभी राष्ट्रीय राजनितिक पार्टियों की नज़र इस राज्य में चुनाव जीतने की होती हैं. कहा जाता हैं की अगर अपने उत्तर प्रदेश जीत लिया तो समझ लीजिये 2/3 देश जीत लिया. उसका कारण हैं वो जादुई आंकड़े जिसकी बदौलत केंद्र में सरकार बनती और गिरती हैं. उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा सीट्स होती है और देश में सरकार बनाने के लिए 272 सीट्स चाहिए होती हैं. यही कारण हैं की कांग्रेस अपने जीते हुए राज्यों के लोगों को उनके हाल पर छोड़कर उत्तर प्रदेश में राजनीती कर रही हैं.

एक तरफ प्रियंका गाँधी ने पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की थी की वह स्कूलों से कहें की लॉक डाउन के दौरान बंद रहे स्कूल विद्यार्थियों से फीस न लें दूसरी और उत्तर प्रदेश के स्कूलों ने योगी सरकार के इस फैसले के खिलाफ जब सुप्रीम कोर्ट में अपील लगाई तो स्कूलों के पक्ष लेने के लिए कांग्रेस के ही नेता कपिल सिब्बल आगे आये. पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र में स्कूलो की फीस माफ़ी को लेकर कोई बात ही नहीं की गयी. वही बात करें बिजली के बिल माफ़ी को लेकर तो कांग्रेस उत्तर प्रदेश में इस पर राजनीती कर रही है लेकिन अपने राज्यों में बिजली के बिल माफ़ी को लेकर कोई बात नहीं कर रहा.

ऐसे में सवाल यही हैं क्या कांग्रेस को सच में लोगों की चिंता हैं? क्योंकि अगर होती तो पंजाब और राजस्थान में तो कांग्रेस की बहुमत वाली सरकार हैं. वहां पर यह सुविधाएँ जनता को क्यों नहीं दी जा रही? जिस सुविधाओं को लेकर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में दिन-रात राजनीती कर रही हैं?

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