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लेमनग्रास की खेती कर किसान ने कमाएं तीन लाख रुपए

खबरों का विश्लेषण

देश में किसानों की दुर्दशा किसी से छुपी हुई नहीं हैं, लेकिन इसकी एक वजह यह भी हैं की भारतीय किसान अपनी फसलों में ज्यादा बदलाव नहीं करना चाहते. कोई गेहूं की फसल उगाता है तो वो उससे आगे नहीं बढ़ना चाहता ऐसे और भी बहुत सारी फसलों या सब्ज़ी उगाने वाले किसानों पर लागू होती हैं.

जरूरत है, किसानों को नई तकनीक और बदलाव की जिससे वो उस फसल को को उगा सके जिसकी मार्किट में डिमांड तो ज्यादा हो लेकिन पैदावार कम. आज हम आपको ऐसी ही एक लेमनग्रास की खेती या फिर नींबू घास या मालाबार घास या कोचीन घास. जैसा भी आपके क्षेत्र में इसे कहा जाता हो हम बात करने जा रहें हैं.

लेमनग्रास की खेती की बात करें तो आज भी इसकी मांग के हिसाब से बहुत कम मात्रा में होती हैं. हालाँकि असम, बंगाल, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसान इसे उगा कर अच्छा मुनाफा कमा रहें हैं. आपको हैरानी होगी लेकिन लेमनग्रास की खेती पर न तो बाढ़ का असर होता हैं और न ही सूखे का.

इसलिए अगर आपका खेत किसी ऐसे क्षेत्र में पड़ता है जहां बाढ़ या सूखा आते-जाते रहते हैं तो आप इस दौरान भी अपने खेत से पैसा कमा सकते हैं. अगर रोपाई की बात करें तो महज़ एक बार रोपाई करने के बाद लगभग 4 से 5 साल तक इसकी फसल से मुनाफा कमाया जा सकता हैं.

अब आप सोचकर देखिये एक बार रोपाई करनी हैं, बाढ़ और सूखे का इस फसल पर असर नहीं होता और 4 से 5 साल तक पैदावार भी देती रहेगी, इसके इलावा मार्किट में इसकी अच्छी मांग भी हैं. ऐसे में फिर भी हमारे देश के किसान भाई इस लेमनग्रास की खेती से परहेज़ करते हैं.

अगर आप लेमनग्रास की खेती के बारे में विचार कर रहें है तो आपको बता दें, इसको लगाते समय लाइन से लाइन की दूरी 50 सेंटीमीटर और पौध से पौध की दूरी 40 सेंटीमीटर कम से कम रखे.

फसल भले ही आपको 4-5 साल तक मिलेगी फिर भी आपको अपनी फसल की निराई-गुड़ाई साल में दो से तीन जरूर करनी हैं. फसल लगाने के तीन महीने बाद पैदावार की पहली खेप तैयार हो जाएगी और उसके बाद 4-5 साल तक हर ढाई से तीन महीने में इसकी खेप को आप बाजार में बेच कर अच्छा मुनाफा कमा सकेंगे.

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