नई दिल्ली: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति बनने को भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्षम नेतृत्व और मार्गदर्शन में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बढ़ती प्रभावशाली भूमिका को एक बार फिर साबित किया है।
राजनाथ सिंह के मुताबिक, किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर वास्तविक नेतृत्व का मतलब अपनी राय दूसरे देशों पर थोपना नहीं, बल्कि अलग-अलग विचार रखने वाले देशों को साथ लेकर सर्वसम्मति कायम करना है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वैश्विक स्तर पर भारत के विचारों को गंभीरता से सुना जा रहा है।
नई दिल्ली घोषणापत्र पर बनी पूर्ण सहमति
ब्रिक्स देशों के बीच नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनाना आसान नहीं था। संगठन के सदस्य देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग मत रहे हैं। इसके बावजूद लंबी चर्चाओं और बैठकों के बाद सभी पक्षों को एक साझा दस्तावेज पर सहमत करने में सफलता मिली।
राजनाथ सिंह ने इसे भारत की सहमति बनाने वाली कूटनीति का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, विभिन्न राजनीतिक और रणनीतिक हितों वाले देशों को एक मंच पर लाकर साझा दृष्टिकोण तैयार करना भारत की महत्वपूर्ण कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है।
ईरान और यूएई के मतभेदों के बीच बनी सहमति
नई दिल्ली घोषणापत्र को अंतिम रूप देने के दौरान पश्चिम एशिया से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दे भी चर्चा में रहे। खास तौर पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेदों के कारण आम सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण था।
इससे पहले ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी कुछ मुद्दों पर साझा निष्कर्ष तक पहुंचना मुश्किल रहा था। इसके बाद लगातार बातचीत और मैराथन बैठकों के जरिए विभिन्न पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए घोषणापत्र को अंतिम रूप दिया गया।
140 पैराग्राफ का व्यापक घोषणापत्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किया गया 140 पैराग्राफ वाला नई दिल्ली घोषणापत्र कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों को समेटता है। इसमें अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर सदस्य देशों की साझा चिंताओं को जगह दी गई है।
घोषणापत्र में नागरिक बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के दायरे में आने वाली शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है।
ईरान से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को ध्यान में रखते हुए दस्तावेज की भाषा और प्रावधानों पर व्यापक चर्चा की गई, ताकि अलग-अलग सदस्य देशों की चिंताओं के बीच संतुलन कायम किया जा सके।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर जोर
ब्रिक्स देशों ने मौजूदा क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया है। साथ ही निर्बाध और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति को भी महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में रेखांकित किया गया।
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बीच ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्गों में किसी भी तरह की बाधा का असर कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में ब्रिक्स मंच पर इन मुद्दों को प्रमुखता मिलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का संकेत
राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली घोषणापत्र पर बनी सहमति को भारत की कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग हितों और विचारधाराओं वाले देशों को एक साझा मंच पर लाकर सहमति बनाना आसान काम नहीं है।
भारत की अध्यक्षता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी यह सहमति इस बात का संकेत मानी जा रही है कि वैश्विक कूटनीति में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।