नई दिल्ली। राजधानी नई दिल्ली में शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026 का शानदार आगाज हुआ। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के तहत आयोजित इस महत्वपूर्ण फोरम में सदस्य देशों के प्रमुख उद्योगपति, कारोबारी, सरकारी प्रतिनिधि और नीति-निर्माता एक मंच पर जुटे हैं।
कार्यक्रम को विदेश मंत्री एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संबोधित किया। फोरम का उद्देश्य व्यापार, निवेश, वित्त, अत्याधुनिक तकनीक और सतत विकास जैसे अहम मुद्दों पर सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
चार प्रमुख स्तंभों पर भारत का फोकस
भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष ब्रिक्स की प्राथमिकताओं को चार प्रमुख स्तंभों—लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और स्थिरता (Sustainability)—के इर्द-गिर्द रखा गया है। इन प्राथमिकताओं को सरकार के साथ-साथ कॉर्पोरेट और कारोबारी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम की 7 बड़ी बातें
1. व्यापक व्यावसायिक सहभागिता:
फोरम में ब्रिक्स देशों के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वरिष्ठ मंत्री, सरकारी अधिकारी और नीति-निर्माता आर्थिक सहयोग को लेकर विचार साझा कर रहे हैं।
2. संसाधनों की बेहतर साझेदारी:
एक सदस्य देश में उपलब्ध प्राकृतिक और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल दूसरे सदस्य देशों के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में किया जा सकता है।
3. तकनीक के लिए बड़ा बाजार:
ब्रिक्स देशों के बड़े बाजारों में नई तकनीकों को विस्तार देने और उनके व्यावसायिक इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ेंगी।
4. निवेश और कारोबार के नए अवसर:
फोरम के माध्यम से निवेश योग्य परियोजनाओं की पहचान, नए कारोबारी साझेदारों की तलाश और बाजार विस्तार के अवसर पैदा होंगे।
5. नीतियों पर पड़ेगा असर:
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के सुझाव और फोरम में होने वाली चर्चाएं सदस्य देशों की भविष्य की आर्थिक नीतियों और प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकती हैं।
6. MSME और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर:
छोटे एवं मध्यम उद्योगों को मजबूत करने, डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और सीमा पार व्यापार को आसान बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
7. ब्रिक्स को आर्थिक नेटवर्क बनाने की दिशा:
सदस्य देशों के बीच केवल व्यापारिक संबंधों के बजाय एक मजबूत और एकीकृत आर्थिक नेटवर्क विकसित करने की दिशा में जोर दिया जा रहा है।
ब्रिक्स को मजबूत आर्थिक नेटवर्क के रूप में देखने की जरूरत: जय श्रॉफ
ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष जय श्रॉफ ने कहा कि भारत की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ये प्राथमिकताएं सरकारों के साथ-साथ कॉर्पोरेट और कारोबारी जगत के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
जय श्रॉफ के अनुसार, ब्रिक्स को केवल बड़े बाजारों के समूह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक एकीकृत आर्थिक नेटवर्क के तौर पर विकसित करने की जरूरत है। प्रत्येक सदस्य देश की आर्थिक और तकनीकी ताकत पूरे समूह की क्षमता को बढ़ा सकती है।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सीधा फायदा?
ब्रिक्स बिजनेस फोरम को निजी क्षेत्र और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है। बैठक में होने वाली चर्चाओं से सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने, डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने, MSME क्षेत्र को मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में नीतिगत पहल को बल मिल सकता है।
भारत की प्राथमिकताओं में व्यापार, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शासन संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दे भी प्रमुख हैं।
12 सितंबर से शुरू होगा मुख्य BRICS शिखर सम्मेलन
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के बाद 12 सितंबर से मुख्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता के दौरान शुरू की गई पहलों और रणनीतिक साझेदारियों की समीक्षा की जाएगी।
मुख्य सम्मेलन में इन मुद्दों पर विशेष चर्चा होने की संभावना है:
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाना।
- सीमा पार भुगतान व्यवस्था में सुधार।
- स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देना।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल कॉमर्स के लिए जिम्मेदार मानक विकसित करना।
- ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटना।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के विस्तार पर चर्चा।
- वैश्विक वित्तीय एवं राजनीतिक संस्थानों में समय के अनुरूप सुधार।